जहाँ तेरा नक्श-ए-कदम देखतें हैं,
खियाबां खियाबां इरम देखतें हैं
तेरे सर्व कामत से एक कद-ए-आदम ,
क़यामत के फितने को कम देखतें हैं
तमाशा कर ऐ महव-ए-आइनादारी,
तुझे किस तमन्ना से हम देखतें हैं
सुराग-ए- तफ-ए- नाला ले दाग-ए-दिल से,
के शबरौ का नक़्श-ए-क़दम देखते हैं
बना कर फकीरा का हम भेस ‘ग़ालिब’
तमाशा-ए-अहल-ए-करम देखतें हैं
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शायरी: Hindi Shayari
करके अरमानो का कत्ल कांधा देता है कोई
खुद ही रुलाकर उन्हे, रुमाल थमा देता है कोई
यूं तो इंसाफ ख़ुदा का पाता है हर कोई
लेकिन अपनी नज़र मे गिरकर कैसे जी लेता है कोई
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शायरी: Hindi Shayari
कभी ख्याल बगावत का
कभी ख्याल इबादत का
ख्याल अब टूटने लगे
ये तक़ाज़ा है वक्त की शरारत का
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शायरी: Hindi Shayari
आज सर्द हवा ने फिर कुछ येसा कर डाला
गरम था अहसास लेकिन दिल जला डाला
यूँ तो नाम उनका जुबां पर नही है
लेकिन मौसम ने याद मे जाम पिला डाला
खियाबां खियाबां इरम देखतें हैं
तेरे सर्व कामत से एक कद-ए-आदम ,
क़यामत के फितने को कम देखतें हैं
तमाशा कर ऐ महव-ए-आइनादारी,
तुझे किस तमन्ना से हम देखतें हैं
सुराग-ए- तफ-ए- नाला ले दाग-ए-दिल से,
के शबरौ का नक़्श-ए-क़दम देखते हैं
बना कर फकीरा का हम भेस ‘ग़ालिब’
तमाशा-ए-अहल-ए-करम देखतें हैं
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शायरी: Hindi Shayari
करके अरमानो का कत्ल कांधा देता है कोई
खुद ही रुलाकर उन्हे, रुमाल थमा देता है कोई
यूं तो इंसाफ ख़ुदा का पाता है हर कोई
लेकिन अपनी नज़र मे गिरकर कैसे जी लेता है कोई
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शायरी: Hindi Shayari
कभी ख्याल बगावत का
कभी ख्याल इबादत का
ख्याल अब टूटने लगे
ये तक़ाज़ा है वक्त की शरारत का
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शायरी: Hindi Shayari
आज सर्द हवा ने फिर कुछ येसा कर डाला
गरम था अहसास लेकिन दिल जला डाला
यूँ तो नाम उनका जुबां पर नही है
लेकिन मौसम ने याद मे जाम पिला डाला
